नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा माता के चौथे रूप माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है ।माँ कुष्मांडा 8भुजाओं वाली दिब्य सक्ति के रूप में है ,जो अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी ।
मान्यता के अनुसार सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ अंधियारा था और माँ ने अपनी हल्की हसी से पूरे ब्रह्मांड को रच डाला ।सूरज की तपिश को सहने की सक्ति माँ के अंदर है ।
माँ कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख ,सौभाग्य और बुद्धि की प्राप्ति होती है ।देबि के पुराण के अनुसार ,पढ़ने वाले छात्रों को माँ कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए ।माँ दुर्गा उनकी बुद्धि का बिकाश करने में सहायक होती है ।
इसलिए माँ कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए ।
नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा माता के चौथे रूप माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है ।माँ कुष्मांडा 8भुजाओं वाली दिब्य सक्ति के रूप में है ,जो अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी ।
मान्यता के अनुसार सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ अंधियारा था और माँ ने अपनी हल्की हसी से पूरे ब्रह्मांड को रच डाला ।सूरज की तपिश को सहने की सक्ति माँ के अंदर है ।
माँ कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख ,सौभाग्य और बुद्धि की प्राप्ति होती है ।देबि के पुराण के अनुसार ,पढ़ने वाले छात्रों को माँ कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए ।माँ दुर्गा उनकी बुद्धि का बिकाश करने में सहायक होती है ।
- इसलिए माँ कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए ।
