खगड़िया में गूंजी नारी शक्ति की हुंकार, ओजस्विनी के प्रशिक्षण वर्ग में सैकड़ों बहनों ने सीखे आत्मरक्षा के गुर

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राजीव की रिपोर्ट

खगड़िया में गूंजी नारी शक्ति की हुंकार, ओजस्विनी के प्रशिक्षण वर्ग में सैकड़ों बहनों ने सीखे आत्मरक्षा के गुर

संस्कार, साहस और आत्मरक्षा से सशक्त मातृशक्ति ही मजबूत समाज की आधारशिला : ओजस्विनी

खगड़िया, 09 अगस्त। अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद – उत्तर बिहार प्रांत के तत्वावधान में राष्ट्रीय महिला परिषद – ओजस्विनी का एक दिवसीय प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग रविवार को श्री राम भवन, बाजार समिति रोड, खगड़िया में उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में सैकड़ों बहनों ने भाग लेकर आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं श्रीराम दरबार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलित करके किया गया। उद्घाटन सत्र में ओजस्विनी की केंद्रीय अध्यक्ष सुश्री रजनी ठकुराल, अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह, हिन्दू हेल्पलाइन उत्तर बिहार के प्रांत अध्यक्ष नितिन कुमार, राष्ट्रीय महिला परिषद–ओजस्विनी उत्तर बिहार की अध्यक्ष श्रीमती अनीता देवी, प्रांत उपाध्यक्ष जवाहर झा, रंजीत सिंह, पंकज सिंह, महेंद्र यादव एवं सतीश झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ किया।

परिचय सत्र के पश्चात जिला अध्यक्ष नीरज सिंह, महामंत्री संजय वर्मा, मंत्री सन्नी गुप्ता सहित अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा अतिथियों एवं पदाधिकारियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

आत्मरक्षा प्रशिक्षण बना आकर्षण का केंद्र

प्रशिक्षण वर्ग के दूसरे सत्र में उपस्थित सैकड़ों बहनों को दंड प्रहार, तीर-धनुष, एयर गन एवं मार्शल आर्ट जैसी आत्मरक्षा की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से बहनों को विषम परिस्थितियों में सजग रहने, आत्मविश्वास बनाए रखने तथा अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का प्रशिक्षण दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को अबला नहीं, बल्कि शक्ति का स्वरूप माना गया है। भारतीय परंपरा की वीरांगनाओं ने सदैव साहस, त्याग और आत्मसम्मान का परिचय दिया है। आज आवश्यकता है कि मातृशक्ति अपने संस्कारों और सनातनी मूल्यों को आत्मसात करते हुए ज्ञान, संगठन और आत्मरक्षा के कौशल से भी सशक्त बने।

उन्होंने कहा, “जिस नारी में संस्कार है, उसके हाथों में सामर्थ्य भी होना चाहिए।” आत्मरक्षा का प्रशिक्षण किसी भय का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सजगता और स्वाभिमान का प्रतीक है।

ओजस्विनी के इस प्रशिक्षण वर्ग ने “संस्कार से चरित्र, संगठन से शक्ति और आत्मरक्षा से आत्मविश्वास” का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम के माध्यम से मातृशक्ति को सनातन संस्कृति, समाज सेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम की सफलता में अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद एवं राष्ट्रीय महिला परिषद – ओजस्विनी के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

🚩 नारी शक्ति — राष्ट्र शक्ति 🚩

🚩 संस्कार भी, सामर्थ्य भी 🚩

🚩 जय श्रीराम! भारत माता की जय! 🚩

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