शारदा सिन्हा की आत्मा की शांति हेतु श्रद्धांजलि सभा आयोजित*

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*शारदा सिन्हा की आत्मा की शांति हेतु श्रद्धांजलि सभा आयोजित*

*शारदा सिन्हा के निधन से हम बिहार वासी काफी मर्माहत हैं:बबलू मंडल*

*शारदा सिन्हा के निधन से कला जगत में सन्नाटा:सतीश आनंद*

*शारदा दी संगीतीय क्षितिज की स्वर सम्राज्ञी थीं:राकेश शास्त्री*
खगड़िया ।

शहर के एमजी मार्ग लक्ष्मी कॉम्प्लेक्स स्थित जदयू कला संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ सह कला निकेतन के संयुक्त तत्वावधान में व कला निकेतन के कार्यालय कक्ष में प्रकोष्ठ सह कला निकेतन के जिला अध्यक्ष वरिष्ठ रंग कर्मी सतीश आनंद अधिवक्ता की अध्यक्षता में स्मृति शेष स्वर कोकिला पद्मविभूषण शारदा सिन्हा की आत्मा की शांति हेतु श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया गया।जिसका संचालन कला निकेतन के जिला उपाध्यक्ष व जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने किया।जहां सर्वप्रथम उपस्थित सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्त्ताओं,बुद्धिजीवियों व कला निकेतन के पदाधिकारियों के द्वारा उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया गया और दो मिनट का मौन धारण कर उनके आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया गया।
जदयू के जिला अध्यक्ष बबलू कुमार मंडल ने कहा कि शारदा सिन्हा गीत संगीत स्वर की मल्लिका थीं।उनके स्वर की गूंज देश और विदेश में सदा गूंजती रहेगी ।उनके बेहद पक्के और मिट्टी की खुशबू समेटे सुरों से सजे लोक गीतों के बिना बिहार व मिथिलांचल के किसी भी पर्व की कल्पना संभव नहीं है ।उनके निधन से पुरे बिहार मर्माहत हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सतीश आनंद अधिवक्ता तथा जन संघर्ष अभियान के संयोजक सुभाष चन्द्र जोशी ने गहरा शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके स्वर की गूंज शादी समारोह एवं छठ पर्व आयोजन के दौरान ही नहीं बल्कि उनकी ख्याति दूर दूर तक गांव- खलिहानों एवं विदेशों में भी थी।उन्होंने मिथला एवं भोजपुरी गीत को अपनी सुरीली आवाज में गाकर आमजन मानस की भावनाओं से भी जोड़ दिया।
कला निकेतन के जिला उपाध्यक्ष व जदयू प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने शारदा सिन्हा के निधन को संगीत जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि शारदा दी संगीतीय क्षितिज की स्वर सम्राज्ञी, खुबसूरत सितारा और उनकी कोयल सी आवाज थीं ; जो मरकर भी जिन्दा हैं। क्योंकि संगीत जगत के हिन्दी – भोजपुरी के अलावे मैथिली व मघही भाषी नग्मों को भी उन्होंने अपनी जादुई आवाज से अमर बना दिया। शारदा दी ने जीवन के सर रंग – राग और रिश्तों की मिठास को बखूबी सुरों में पिरोया है।शोहर,शादी,संयोग,वियोग, होली,छठ गीत,शक्ति और भक्ति सभी प्रकार के गीत-संगीत शारदा सिन्हा की जुबां पर आकर जिंदा हो उठते थे।शारदा दी न केवल जीते जी अपने करोडों प्रसंशको के बीच लोकप्रिय रहीं बल्कि उनकी पुण्य स्मृतियां उनके मरणोपरांत भी सदा अमर रहेंगी।
वहीं आजपा के प्रदेश अध्यक्ष उमेश ठाकुर, गुड्डू ठाकुर तथा शारदा सिन्हा के रिश्तेदार रमेश चौधरी ने कहा कि शारदा सिन्हा गीत-संगीत के क्षेत्र में जो स्वर की खुशबू बिखेर गई वो सदैव जीवंत रहेंगी।
श्रद्धांजलि सभा में बिससूत्री सदस्या नीलम वर्मा,जदयू नेता उमेश सिंह पटेल ,कला निकेतन के उपाध्यक्ष प्रभात सुमन,अरूणोदय कला संस्कृति मंच के संस्थापक अरूण कुमार वर्मा,कला निकेतन के महासचिव पंकज रंजन, नूतन गुप्ता,कलाकार अभिषेक कुमार, गायक गीता कुमार,फिल्म कलाकार चम्पा राय,श्वाती प्रिया,नरेश कुमार एवं तितली भारती सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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